बच्चों से मिलना उनके साथ खेलना मुझे क्या सबको अच्छा लगता है| नहीं लगता जरूर लगता होगा... वो कहते हैं ना हम सभी में एक छोटा बच्चा छुपा होता है| आप लोगों की तरह जब भी मैं किसी बच्चे को देखता हूं तो एक भिनी सी मुस्कुराहट मेरे चेहरे पर छा जाती है...ना जाने उनसे बात करने का मन होता है| चाहे वो किसी के भी बच्चे क्यों ना हो मगर अब मैं चाहते हुए भी किसी बच्चे से बात नहीं करता ना ही उनहे प्यार करता हूं|
जानते हैं क्यों- अब डरता हूं मैं
क्यों की हमारे बीच रहने वाले कुछ मानसिक रोगियों की वजह से चाहे वो हिंदुस्तान के हो या पाकिस्तान के वो हमारे बिच ही होते हैं, हमारी तरह ही दिखते और बोलते हैं| मगर कौन जाने किसी बच्चे को लेकर उनके दिमाग में क्या चल रहा हो...ये नहीं जानते इनकी यह घिनौनी हरकत की वजह से कितने बच्चों से उनकी आजादी, उनका बचपन छिनता जा रहा है|
अब गलियां विरान दिखती हैं वहां हसते-मुस्कुराते शरारत करते बच्चे जो नहीं दिखते|
अब गलियों में आइसक्रीम वाले को देख कर कोई भी बच्चा अपने घर से बाहर नहीं आता|
मैदान खाली और शांत दिखते हैं वहा अब कोई नहीं खेलता|
भइया, चाचा, अंकल पुकारने वाला अब कोई नहीं|
किसी बड़े से घर के आंगन में बैठे दादा या दादी भी किसी बच्चे को अपने आंगन में नहीं बुलाते|
अब किसी के घर के सिसे भी नहीं टुट्ते, अच्छा है ना|
अब ना ही कोई बच्चों की शिकायत लेकर घर आता है क्यों की अब बच्चे शरारत जो नहीं करते|
अब बच्चे भी इस दुनिया से दूर हो चले हैं और हो भी क्यों ना उनहे उनकी नई दुनिया जो मिल गई है Social Media की दुनिया जहां दोस्त भी मिलते हैं और रिश्तेदार भी|
सच कहूं, तो अब हर मां यही सोचती होगी की बेटा हुआ तो खुशी तो है मां बनने की लेकिन बेटी की चाहत अब तक बनी हुई थी। अब नहीं…अब बिल्कुल नहीं, रूह कांपती है…अच्छा हुआ मैंने बेटी नहीं पैदा किया। मेरे साथ टीवी देखते हुए जब वो मुझसे सवाल करती कि ममी इस लड़की के साथ क्या हुआ तो मैं क्या कहती? गुड टच, बैड टच एक बार को किसी तरह से समझा भी देती लेकिन उसका बचपन, उसकी आजादी छीनने की हिम्मत न जुटा पाती। अंकल के घर मत जाना… न कह पाती, चाचा से दूर रहना न कह पाती, बाबा से न चिपकना, न कह पाती
एक ऐसी उम्र जब बच्चे कपड़ों से ममी और पापा में फर्क करते हैं। फ्रॉक को अपनी ड्रेस और पैंट को भईया की ड्रेस समझते हैं| इस उम्र में उनके साथ यह दरिंगदी आखिर क्यों...सोचने भर से काप जाता हूं मैं|
दिल्ली की पांच साल की गुड़िया तो याद है ना आपको, वहीं पाकिस्तान की सात साल की मासूम जैनब जिसके जनाजे के बोझ तले पूरा पाकिस्तान दबा हुआ था तो अब जम्मू की आसिफा दिल को झकझोर देने वाली यह घटना|
आखिर कब तक
आखिर कब तक
यह मासूम बच्चे तो अब स्कूल, घर और मंदिर तक में सुरक्षित नहीं|