Saturday, 7 January 2017

तुम मेरे लिए परेशान होना बंद करो, क्यों की जब मैं लुट रही थी-तुम भी वहीं-कहीं थे....दुर.

तुम मेरे लिए परेशान होना बंद करो, क्यों की जब मैं लुट रही थी-तुम भी वहीं-कहीं थे....दुर.
मैं एक लड़की हुं......एक बेबस लड़की, इस जबाने में कन्धे से कन्धा मिला कर चलना भी चाहू तो तोड़ दी जाती हुं.....
औफिस से कभी घर जाने में लेट हो जाए तो एक डर सा मैहसुस करती हुं आज मैं सही सलामत घर पहुच सकुँगी या नहीं अगर घर आभी गई तो नाजाने कितनी गंदी नजरें मेरा पिछा करती हुई मुझे घर तक छोड़ेगी.......
डराती है मुझे लोगों की गंदी नजरें, कैसे खुद को इन गंदी नजरों से मैं बचती हु.
कपड़ों को चीरकर मेरे तन को छूती हैं नजरें,
क्रोध के ज्वालामुखी को कब तक दबाऊँगी.
मेरे चेहरे पर टिकी नजरें हटा नहीं पाती हूँ,
छाती पर गढ़ी नजरें बोलो मैं कैसे हटाऊँगी.
कुछ नजरें टिकी रहती हैं पेट और नाभि पर,
अपने जिस्म को उन नजरों से कैसे छिपाऊँगी.
मैं वही" निरभया" हुं जब लुट रहीं थी तब किसी ने बचाया नहीं और मेरे मौत के बाद सड़को में एक हुजूम सा लगा दिया..तब भी मैंने ये सोचा बदल जाए गी ये दुनिया मगर मैं गलत थी.......
कभी सड़को में तो कभी बस में.....स्कुल और घर तक में भी मैं सुरक्षित नहीं.....
नए साल पर बेंगलुरु में हुए इस सरमनाक हादसे के बाद तो मैं पुरी तरह से टुट गई हुं...............................
Dedicated to abused Girls during the eve of new year..